Wednesday, December 1, 2010

Memorandum Supporting Petition of Dr.Anupama Singh, New Delhi, praying for Amendments in Section 498A of IPC, 1860.

Memorandum Supporting Petition of Dr.Anupama Singh, New Delhi,
praying for Amendments in Section 498A of IPC, 1860.

To
Shri Bhagat Singh Koshyari,
Member,
Rajya Sabha,
New-Delhi. To
Sri Rakesh Naithani,
Joint Director, Rajya Sabha Secretriat,
Parliament House Annexe
New Delhi – 110001

महोदय,
मैं आपका ध्यान IPC, 1860 के धारा 498A के दुरूपयोग की तरफ आकर्षित करना चाहता हूँ| यह क़ानून उस समय के परिस्थिति के अनुसार बहुत अच्छे उद्देश्य से बनाया गया था| किन्तु आज की सामाजिक मूल्य और परिस्थितियों के बदलने के कारण इस क़ानून का दुरूपयोग ही हो रहा है| साधारणतया लड़कियां कोई भी बात या कार्य अपनी मनमर्जी के अनुसार न होने पर अपने पति एवं ससुराल पक्ष के सम्बन्धियों को पहले तो धमकाती और Blackmail करती हैं, सामने से कोई भी प्रतिक्रिया होते ही सीधे शिकायत कर के ससुराल पक्ष को जेल करवाने की कोशिश पर उतर जाती है|

मेरा आपसे विनम्र निवेदन है की इस पर ध्यान देते हुए आप इस कानून में उपयुक्त संशोदन करने की व्यवस्थता करें|

इस कानून के कुछ बुरे परिणाम:
१. नौजवान पीढ़ी, बुजुर्ग, बच्चे, औरतें, गर्भवती महिलाएं, सभी को Harassment होती है|
- यहाँ तक की इस काननों के कारन एक २ माह के बच्चे को भी जेल जाना पढ़ा है|

२. इस कानून का दुरूपयोग कर के अनगिनत मूल्यहीन महिलाओं ने बड़ी रकमें वसूल की है| देखादेखी अनेक लड़कियां इसे आसान कमाई का ज़रिया बना रही हैं| कहीं-कहीं तो इसी उद्देश्य को सामने रखकर शादियाँ हो रही है|

३. Dowry Death कानून का भी बहुत दुरूपयोग हो रहा है| मृत घोषित की गई औरत भी जिंदा पाई गई हैं|

४. ऐसे भी कई केस हैं जहाँ एक ही लड़की ने अनेक शादियाँ करके Black Mail करके अथवा केस कर लड़कों को लूटा है|

५. इस कानून को लड़कियां, लड़के को उसके माँ-बाप से अलग करने अथवा अपने पीहर में जाकर रहने के लिए मजबूर कर देती हैं|

६. इस कानून के कारण लड़की द्वारा परिवार के बड़े बुजुर्गों की बेइज्जती करने की परम्परा बनती जा रही है|

७. जुर्म साबित होने तक हर व्यक्ति निर्दोष होता है, किन्तु इस कानून मैं मात्र शिकायत पर ही व्यक्ति को अपराधी मान लिया जाता है| यह इस कानून का सबसे गलत प्रावधान है|

८. अनेक समय, लड़की का अन्य प्रेम प्रसंग चलने पर, माता-पिता द्वारा दबाव से शादी काराने पर इस कानून का सहारा लड़की लेती है|

९. पति-पत्नी के अलग हो जाने पर भी, Child-Custody को लेकर औरत पुरुष को 498A का केस करने की धमकी देती है और कानून का दुरूपयोग करती है|

१०. इस कानून के कारण हमारे देश का पारिवारिक संस्कृति भी खत्म हो रहा है|

११. बहुत से नवयुक और उसके परिवारवाले प्रताडना न झेल पाने की दशा में आत्महत्या भी कर लेते हैं|

इस कानून के दुरूपयोग के मुख्य कारण:

१. इसमें Arrest करने के लिए Warrant की ज़रूरत नहीं है|(Cognizable)

२. इसमें Bail सिर्फ कोर्ट से ही मिलती है|(Non-Bailable)

३. यह केस वापस नहीं लिए जा सकते|(Non-Compoundable)

४. गलत सिकायत करने वालों को सजा का कोई प्रावधान नहीं है|

५. जो लोग निर्दोष साबित हो जाते हैं, उन्हें समाज नहीं स्वीकारता|

६. निर्दोष व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक एवं व्यक्तिगत हानि का कोई मुआवजा नहीं है|

७. लोगों को गलत केस करने से निरुत्साहित या उन्हें रोकने का कोई प्रावधान नहीं है|

८. जो अधिकारी गलत केस में लड़की पक्ष की मदद करते हैं, या उनका साथ देते हाँ, उन पर कार्यवाही या दंड का कोई प्रावधान नहीं है|

९. लड़कियों द्वारा किये गए अत्याचार, जुर्म से रक्षा के लिए कोई कानून या प्रावधान नहीं है|

१०. लड़की की शिकायत मात्र को बिना किसी जांच, पूछताछ एवं सबूत के सच मान लिया जाता है और लड़के और उसके परिवार को सजा दे दी जाती है|

११. लड़की परिवार के किसी भी सदस्य, रिश्तेदार या मित्र, जिसका भी नाम शियात में लिख देती है उस पर कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी जाती है या गिरफ्तार भी कर लिया जाता है, भले ही उस व्यक्ति की इसमें कोई भी धकालान्दाजी न हो|

१२. कानून एवं समाज का झुकाव पूर्णतः लड़की(दुल्हन) की तरफ है|

१३. दुल्हन के सिवा यह कानून लड़के, उसकी माँ, उसके पिता, उसकी बहनों, भाइयों या किसी भी और के प्रति पूर्णतः असवेंदंशील है|

निवेदन :
मेरा आपसे निवेदन है की लाखों, करोंडों लोगों को इस असवेंधानिक कानून से कृपया निजात दिलाएं और कानून में उपयुक्त संशोधन करें ताकि मूल्यहीन, ब्रष्ट और निर्मम लोगों की वजह से मासूम एवं निर्दोष लोगों को बचाया जा सके| ऐसा कानून बनायें जिसे कोई भी अपने निजी स्वार्थ या बदला लेने के लिए दुरपयोग ना कर सके|

दोषियों को सजा देना ज़रूरी है, लेकिन उससे ज़रूरी है निर्दोषों की सुरक्षा|

मेरे कुछ सुझाव:
१. कृपया 498A को Bailable, Non-Cognizable एवं Compoundable बनायें|

२. गलत उपयोग/शिकायत दर्ज करने वालों के ऊपर कड़े दंड का प्रावधान हो|

३. इस कानून का गलत उपयोग करने वाले द्वारा निर्दोष व्यक्ति को उसके आर्थिक, सामजिक एवं व्यक्तिगत नुक्सान की उपयुक्त भरपाई करने का प्रावधान हो|

४. कानून महिलों एवं पुरषों के लिए एक सामान हो|

५. इस तरह के पारिवारिक केसों का निपटारों एक तय समय सीमा के अंदर हो, जैसे ६ माह के अंदर|

इस विषय में और चर्चा और परामर्श करने के लिए में कभी भी तत्पर तयार हूँ| में Committee से मिल कर उनके समक्ष अपनी बात को और विस्तार में चर्चा करने में इक्षुक हूँ| कृपया मुझे committee से मिलने का मौका प्रधान करें|

Law Commission, मलिमथ कोम्मित्ती ने अपनी १५४ वि रिपोर्ट में यह स्वीकारा है की 498A कानून का दुरूपयोग हो रहा है|

एक नज़र इनपे भी डालें
कुछ पीड़ित लोगों की कहानी:
१३-०१-२०१० दिल्ली, ASI को कानून के दुरूपयोग में रिश्वत लेते पकड़ा गया|
०९-०३-२०१० पुणे, अमोल ने आत्महत्या की|
१०-०४-२०१० लखनऊ, पंडित राम शंकर, खुद का श्राद मनाया|
१२-०४-२०१० पुणे, पंकज ने आत्महत्या की|
१९-०४-२०१० बोरीवली(मुंबई), पाठील, Inspector ने आत्महत्या की
२७-०४-२०१० चेन्नई, सेल्वम ने खुद को गिरफ्तार करवाया|
१५-०५-२०१० ५२ वर्षीया बुजुर्ग ने आत्महत्या की|
०२-०६-२०१० सशिधारण, Sub-Inspector ने आत्मा-हत्या की|
२३-०६-२०१० खेडा(गुजरात) के कालाभाई ने गुजरात High Court से आत्महत्या करने की अनुमति मांगी|
२९-१०-२०१० नौजवान(२८ वर्षीया) युवक ने आत्महत्या की|



२००५ में 498A के केस जो दर्ज किया गए - ५८,३१९
केस जो Charge sheet में ही ख़ारिज कर दिए गए - १०,४९१ (१८%)
केस जिसमे सबको निर्दोष पाया गया - २४,१२७ (४१%)
केस जिसमे दोषी पाए गए - ५,७३९ (९.८%)

गिरफ्तार किये गए १,३४,७५७ लोगों में से सिर्फ ५,७३९ केस जिसमे दोषी पाए गए|


महिलाएं जिन्होंने पति पे गलत आरोप करना स्वीकारा:

२३-०९-२०१० बंगाली अभिनेत्री स्वस्तिका मुखर्जी ने झूठे आरोपों को स्वीकारा|

कोर्टों ने 498A के दुरूपयोग को स्वीकारा:

१९-०७-२००५ Supreme Court ने इसे कानूनी आतंकवाद कहा|
०४-०२-२०१० अम्बाला कोर्ट, कानून का दुरूपयोग स्वीकारती है|
१६-०४-२०१० मुंबई High Court ने कानून के दुरूपयोग को स्वीकारा|
१४-०८-२०१० Supreme Court ने सरकार से कानून में संशोदन के लिए कहा|
२२-०८-२०१० बंगलूरू High Court ने दुरूपयोग को स्वीकारा|
२२-०८-२०१० Central Government ने प्रदेशों की पुलिस को इस कानून के दुरूपयोग की चेतावनी दी|
११-०६-२०१० Supreme Court ने पतियों से स्वतंत्रता भूल जाने को कहा|

भवदीय,

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